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धातु प्रकरण  आजकल सभी शिक्षार्थी पूरे उत्साह से मंदिर-प्रांगण में शाम को एकत्र हो रहे हैं। #आचार्य_पूर्णेन्दु की #सरल_विधि सभी को भा रही है। आज सब ही आगे का पाठ सीखने वाले हैं। आचार्य जी के आते ही सभी उन्हें प्रणाम कर बैठ गए। फिर वही प्रश्न उठा कि क्रिया कैसे लगाएँ? आचार्यवर - मुस्कान! तुमने अँगुलि में क्या पहना है? मुस्कान- जी! अँगुठी है। आचार्यवर- किस धातु की है? मुस्कान- सोने की है। आचार्यवर- अरे शर्मा जी! आपने तो सुन्दर चैन पहनी है। किस धातु की है? शर्मा जी- गुरुजी ये सोने की है। गुरुजी- बेटी दीपशिखा! तुमने भी कान में कुछ पहना है। किस धातु का है? दीपशिखा- गुरुजी! ये सोने की बाली है। गुरुजी- आप लोगों को लग रहा होगा कि ये क्या फालतू बात ले बैठे? पर ऐसा नहीं है। यहाँ आप लोगों ने गौर किया? सभी ने अलग-अलग गहने पहने हैं मगर सभी की "धातु" सोना है।  सोना, चाँदी, पीतल, काँसा, ताम्बा और भी न जाने कितने प्रकार क धातुएँ होती हैं जिनसे लोग आवश्यकता के अनुसार गहने, बरतन या वस्तुएँ बनाते या बनवाते हैं। इतनी बात समझ में आयी? सब- जी ! गुरुजी- आगे सुनें! इसी तरह संस्कृत में भी...