वचन प्रकरण
वचन -प्रकरण आचार्य पूर्णेन्दु के सामने आज सायंकालीन आरती के बाद संस्कृत सीखने वालों की संख्या बढ़ गयी है। कुछ बच्चों के साथ उनके बड़े भाई-बहन भी आए हैं। अतः आचार्य जी ने छात्रों व छात्राओं को पृथक्-पृथक् पंक्तियों में बैठाया। अब कक्षा आरंभ हुई । लालिमा- गुरुजी! मैंने पढ़ा है कि संस्कृत में तीन वचन होते हैं। एकवचनम्,द्विवचनम् और बहुवचनम्। हिंदी, English आदि भाषाओं में दो ही वचन होते हैं- एकवचन और बहुवचन। इसलिए बराबर समझ में नहीं आता। गुरुजी- पहली बात तो यह है कि द्वि वचन केवल संस्कृत में ही नहीं है। प्राचीन सभी भाषाओं में यह देखने को मिलता है, फिर वह चाहे यूरोप की लैटिन भाषा ही क्यों न हो। भारत की पालि व प्राकृत भाषाओं में भी यह देखने को मिलता है। कई रिश्तों व संबंधों में दो के बीच ही बातें होती हैं। किसी तीसरे का नाम नहीं होता । संभवतः इसलिए द्विवचन का प्रयोग होता था; किन्तु धीरे-धीरे भाषा के विकास के साथ द्विवचन लुप्त होता चला गया। दूसरी बात यह कि - हाँ! संस्कृत में तीन वचन होते हैं । एक के लिए एकवचनम् दो के लिए द्विवचनम् तथा दो से अधिक के लिए बहुवचनम्। संस्कृत में तीनों...