लिंग विचार

द्वितीय पग
लिंग विचार
अगले दिन प्रातः पूजन व आरती से निवृत्त होकर आचार्य पूर्णेन्दु अपने आसन पर बैठे थे तभी जिज्ञासुओं की वही टोली आगयी। सभी नमन कर बैठ गए।
प्रसू्न- गुरुजी! संस्कृत में कितने लिंग होते हैं?
गुरुजी- संस्कृत में तीन लिंग होते हैं -
१) पुल्लिंग २) स्त्रीलिंग ३) नपुंसकलिंग ।
लतिका- गुरुजी हमने हिंदी में दो ही लिंग पढ़े हैं। पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। ये नपुंसकलिंग कहाँ से आगया?
सभी हँस पड़े। गुरुजी भी हँसते हुए बोले - यह कहीं से आया नहीं है। प्राचीन भाषाओं में नपुंसकलिंग का उपयोग होता था।
हीरल- गुरुजी! आप तो यह बताइए कि संस्कृत में लिंग कैसे पहचानेंगे?
मुस्कान- अरे सिम्पल है। जैसे हिन्दी या इंगलिश में मीनिंग देख के पता करते हैं न बस वैसे ही ।है न गुरुजी ।
गुरुजी- नहीं ऐसा नहीं है। संस्कृत में अर्थ के आधार पर नहीं बल्कि शब्द के आधार पर लिंग पहचानते हैं।
हीरल- मतलब?
गुरुजी- मतलब यह कि कई अर्थों के लिए तीनों लिंगों में शब्द हैं। जैसे- पत्नी- स्त्री होती है; किन्तु इस अर्थ के लिए 'भार्या' शब्द है जो स्त्रीलिंग शब्द है। तो 'दाराः' शब्द भी है जो पुल्लिंग है। वहीं इसी अर्थ में 'कलत्रम्' का भी प्रयोग होता है जो नपुंसकलिंग है।
दूसरा उदाहरण - शब्द का लिंग बदल देने से अर्थ बदल जाता है। जैसे- 'मित्रम् ' जो नपुंसकलिंग शब्द है । इसका अर्थ है दोस्त, सखा। यदि इस शब्द को पुल्लिंग 'मित्र:' करदें तो इसका अर्थ होगा सूर्य। तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठा लाला सूर्य को अर्घ्य जल चढ़ाते हुए कहता है न "ॐ मित्राय नमः"। वह सूर्य का मंत्र बोल रहा होता है। ठीक है न?
राधेलाल- याने संस्कृत में शब्द के अनुसार लिंग पहचानते हैं अर्थ के अनुसार नहीं।
गुरुजी- हाँ। देखो मंदिर का सेवक तक इस बात को समझ गया।
सभी- हम भी समझ गए।
मुस्कान - कौन-सा शब्द किस लिंग का है, कैसे पहचानेंगे?
गुरूजी बताने जा ही रहे थे कि मुस्कान की मम्मी ने दूध पीने के लिए आवाज़ लगाई।
गुरूजी- तुम लोग दूध पीकर नहीं आए हो क्या?
मुस्कान- मुझे  दूध अच्छा नहीं लगता।
गुरुजी- तुम बच्चों को दूध जरूर पीना चाहिए। इससे शरीर मजबूत होता है। जाओ पहले दूध पीकर आओ फिर बात करेंगे।
सभी गुरुजी की बात मानकर जल्दी ही आने के लिए चले गए।

सभी बच्चे दूध पीकर लौट आए।
मुस्कान ने अपना प्रश्न दोहरा दिया- कैसे पहचानेंगे कि कौन-सा शब्द किस लिंग का है?
गुरुजी ने बताना शुरु किया- मैं कुछ शब्द लिख रहा हूँ। इनमें क्या समानता है? तुम ही बताओ।
बालकः ,छात्रः, गजः, हंसः, सिंहः,घटः।
कपिः, कविः, इन्दुः भानुः गुरुः।
केशव- इनमें अन्त में विसर्ग है
गुरुजी- और क्या समानता है?
हीरल- अन्त में छोटी मात्रा है ।
गुरुजी- इसे कहेंगे अन्त में ह्रस्व स्वर है । ये पुल्लिंग शब्द हैं।
माधव- ह्रस्व स्वर व विसर्ग से अन्त होने वाले सभी शब्द पुल्लिंग होंगे।
गुरुजी- न न ऐसा नहीं है। यह लगभग ९०% पुल्लिंग शब्दों की पहचान है।
    अच्छा अब अन्य शब्दों को देखो।
कन्या, छात्रा, अजा, माला, वाटिका, ग्रीवा।
नदी, नारी, घटी, देवी।
हरिप्रिया- इनमें अन्त में दीर्घ स्वर हैं और ये स्त्रीलिंग शब्द हैं।
गुरुजी- हरिप्रिया ने एकदम सही उत्तर दिया ।
माधव- क्या अब भी कि यह ९०% स्त्रीलिंग शब्दों की ही पहचान है?
गुरुजी- हाँ। सत्य कथन। अब अन्य शब्दों को देखो।
गगनम् , फलम्, पुष्पम्, जलम्, मुखम्। इनमें क्या समानता है?
ईशान- अन्त में म् है।
गुरुजी- हाँ ठीक बताया। मैं ९०% इसे कह रहा हूँ; क्योंकि बहुत से शब्द इन नियमों से अलग हैं। जैसे- राजा ,चन्द्रमा आदि।
माधव- ऐसा क्यों?
गुरुजी - बेटा! ये धीरे-धीरे बताऊँगा। ठीक !
जितना समझाया, समझ में आया?
सभी एक स्वर में- हाँ गुरुजी !
अब जाओ। कल वचन प्रकरण को समझेंगे।

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